अद्भुत संकल्प
मालवा देश की राजकुमारी विद्योत्तमा अपने रूप व विद्वता के लिए प्रख्यात थी । उस विदुषी का यह प्रण था कि जो युवक शास्त्रार्थ में उसे हरा देगा उसी से वह अपना विवाह करेगी ।
अनेक विद्वानों ने किस्मत आजमाई परंतु राजकुमारी को कोई ना हरा सका । अंत में पंडितों ने आत्मग्लानि से पीड़ित होकर एक कुटिल चाल चली । उन्होंने एक मूर्ख की तलाश शुरू कर दी । एक जंगल में यात्रा करते समय उनकी दृष्टि एक युवक पर पड़ी जो उसी डाल को काट रहा था जिस पर बैठा था ।
पंडितों को वांछित युवक मिल गया । उन्होंने उसे नीचे उतारा और कहा "तुम बिल्कुल मौन रखना । हम तुम्हारा विवाह एक राजकुमारी से करवा देंगे" ।
पंडितों ने उस युवक को सुंदर वस्त्र पहनाए और शास्त्रार्थ के लिए विद्योत्तमा के पास ले गए । युवक का मौन व्रत होने के कारण शास्त्रार्थ संकेतों में होने लगा ।
पंडितों ने एक मत से युवक के मूर्खतापूर्ण संकेतों की ऐसी व्याख्या की कि विद्योत्तमा को हार माननी पड़ी और उससे विवाह कर लिया।
कुछ दिनों तक यह युवक
मौन रहा, तब तक सब ठीक था, परंतु एक दिन वह ऊंट का गलत उच्चारण कर बैठा । तब विधोतमा को सच्चाई का पता चला ।
नागिन की तरह क्रोधित विद्योत्तमा अपने पति को प्रताड़ित व अपमानित कर के महल से बाहर निकाल दिया । अपमानित होकर युवक ने संकल्प किया कि वह विद्वान बन कर ही महल में लौटेगा ।
अपने संकल्प के अनुसार युवक ने अध्ययन आरंभ कर दिया और कठोर परिश्रम करके महान विद्वान बना । कालांतर में यही युवक महाकवि कालिदास के नाम से प्रख्यात हुआ ।

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