Saturday, May 4, 2019

बालक का त्याग

बालक का त्याग 


एक क्षेत्र में लगातार 12 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई | चारों और दुर्भिक्ष आया था | सारे नदी नाले सूख गए| वहां के लोगों के पास इतने साधन नहीं थे कि बड़े यज्ञ कर सके | एक ऋषि ने लोगों से कहा - "भूख से पीड़ित क्षेत्र में लोगों के लिए नरमेध यज्ञ करना होगा, इसके लिए एक व्यक्ति की बलि की आवश्यकता है "| यह सुनते ही चारों ओर नीरवता छा गई | बली के लिए आगे कौन आता | उन सबको यूँ शांत देखकर शांत देखकर महात्मा ने 
कहा - "क्या आप सब में से किसी में भी इतना साहस नहीं कि स्वयं को प्रस्तुत कर सके"|



इतने में एक बालक की आवाज आई, "महर्षि मैं अपना बलिदान देने के लिए सहर्ष प्रस्तुत हूं" । उस बालक का नाम शतमन्यु था, और वह अपने माता पिता की इकलौती संतान था । उसने ऋषिवर से कहा "महात्मा आप यज्ञ आरंभ करें, मैं अपने माता पिता की आज्ञा लेकर अभी आता हूं | इसके बाद वह अपने घर पहुंचा और माता पिता को अपने फैसले की जानकारी दी | माता पिता भी उसके तर्क के समक्ष ना नहीं कह सके | इसके बाद वह लौटकर पुनः यज्ञ स्थल पर आ गया । 

बली का समय आया बालक निर्भीक भाव से शावक के समान  अपना मस्तक ऊंचा किए हुए बलिवेदी पर जाकर खड़ा हो गया । यज्ञाचार्य ने  बालक सेे कहा आप सबका अंतिम अभिवादन कर लो। ज्योही  पुरोहित ने हाथ में खडक लिया कि आकाश मंडल का वातावरण बदल गया। देव लोक से पुष्प वर्षा होने लगी। साधु साधु के स्वर उठने लगे। पुष्पों की वर्षा के बीच इंद्रदेव वहां प्रकट हुए और बालक के गले में पुष्प माला डालकर सभी उपस्थित लोगों को संबोधित कर कहा- "मैं इस बालक की त्यागवृृृत्ति से प्रसन्न हूं । अब यहां  मेघ बरसेेंगे । आलस, असंयम, अनैतिकता में डूबे आप सभी लोगों को सचेत करने के लिए दंड दिया गया था। लेकिन जहां ऐसे परमार्थी हो वहां कोई दैवीय आपदा नहीं टिक सकती।"

उपहार

आज सुबह से नव्या के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। कभी रसोई में जाकर देख कर आती क्या-क्या पकवान बन रहे हैं। कभी बैठक में आकर देखती की घर की स...