बालक का त्याग
एक क्षेत्र में लगातार 12 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई | चारों और दुर्भिक्ष आया था | सारे नदी नाले सूख गए| वहां के लोगों के पास इतने साधन नहीं थे कि बड़े यज्ञ कर सके | एक ऋषि ने लोगों से कहा - "भूख से पीड़ित क्षेत्र में लोगों के लिए नरमेध यज्ञ करना होगा, इसके लिए एक व्यक्ति की बलि की आवश्यकता है "| यह सुनते ही चारों ओर नीरवता छा गई | बली के लिए आगे कौन आता | उन सबको यूँ शांत देखकर शांत देखकर महात्मा ने
कहा - "क्या आप सब में से किसी में भी इतना साहस नहीं कि स्वयं को प्रस्तुत कर सके"|
इतने में एक बालक की आवाज आई, "महर्षि मैं अपना बलिदान देने के लिए सहर्ष प्रस्तुत हूं" । उस बालक का नाम शतमन्यु था, और वह अपने माता पिता की इकलौती संतान था । उसने ऋषिवर से कहा "महात्मा आप यज्ञ आरंभ करें, मैं अपने माता पिता की आज्ञा लेकर अभी आता हूं | इसके बाद वह अपने घर पहुंचा और माता पिता को अपने फैसले की जानकारी दी | माता पिता भी उसके तर्क के समक्ष ना नहीं कह सके | इसके बाद वह लौटकर पुनः यज्ञ स्थल पर आ गया ।

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